कानून मानता है पढ़ी-लिखी पत्नी कमा सकती है, फिर भी आदेश पति को ही भुगतना है: अदालत और मेंटेनेंस सिस्टम की सच्चाई
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ अदालतें मानती हैं कि शिकà¥à¤·à¤¿à¤¤ और सकà¥à¤·à¤® पतà¥à¤¨à¥€ काम कर सकती है, फिर à¤à¥€ वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° में à¤à¤°à¤£-पोषण का बोठपति पर ही डाला जाता है। कानून में मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ और ज़मीनी हकीकत के बीच यही अंतर पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ की सबसे बड़ी कानूनी पीड़ा बन चà¥à¤•ा है।
नई दिलà¥à¤²à¥€: à¤à¤¾à¤°à¤¤ में मेंटेनेंस के कानूनों का उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ वैवाहिक विवाद या अलग होने के बाद आरà¥à¤¥à¤¿à¤• तंगी को रोकना और मानवीय गरिमा की रकà¥à¤·à¤¾ करना है। इन कानूनों को कà¤à¥€ à¤à¥€ आजीवन आरà¥à¤¥à¤¿à¤• गारंटी या वैवाहिक मà¥à¤•दमों में रणनीतिक हथियार के रूप में इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करने के लिठनहीं बनाया गया था। à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ अदालतें बार-बार सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ कर चà¥à¤•ी हैं कि मेंटेनेंस का मकसद वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• आरà¥à¤¥à¤¿à¤• आवशà¥à¤¯à¤•ता को पूरा करना है, न कि किसी सकà¥à¤·à¤® वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को जानबूà¤à¤•र आरà¥à¤¥à¤¿à¤• निरà¥à¤à¤°à¤¤à¤¾ में बनाठरखना।
समय के साथ, मेंटेनेंस से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ मà¥à¤•दमों ने सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ और जवाबदेही के बीच à¤à¤• गंà¤à¥€à¤° कानूनी टकराव को उजागर किया है । जिससे यह सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ हà¥à¤† है कि कई पति, पतà¥à¤¨à¥€ की कमाने की सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ होने के बावजूद, आरà¥à¤¥à¤¿à¤• और मानसिक दबाव à¤à¥‡à¤²à¤¨à¥‡ के लिठविवश हैं।
कà¥à¤¯à¤¾ केवल शिकà¥à¤·à¤¾ के आधार पर à¤à¤°à¤£-पोषण से इनकार किया जा सकता है?
अगर बात केवल शिकà¥à¤·à¤¾ के आधार पर मेंटेनेंस निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करने की है तो इसका जवाब है नहीं, परनà¥à¤¤à¥ मेंटेनेंस निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करते समय इसे à¤à¤• महतà¥à¤¤à¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ आधार माना जाता है ।
सिरà¥à¤« किसी महिला के पास डिगà¥à¤°à¥€ होना उसे à¤à¤°à¤£-पोषण से सà¥à¤µà¤¤à¤ƒ वंचित नहीं करता। लेकिन जब शिकà¥à¤·à¤¾ के साथ रोजगार-योगà¥à¤¯à¤¤à¤¾, पेशेवर योगà¥à¤¯à¤¤à¤¾, वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• कौशल या à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤‚स जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ हो, तो अदालतें यह सवाल उठाती हैं कि वह काम कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ नहीं कर रही है।
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ अदालतों का दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ है—जानबूà¤à¤•र बेरोजगारी को पà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ नहीं किया जा सकता।
यहाठशिकà¥à¤·à¤¾ तब कानूनी रूप से पà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤‚गिक बनती है जब वह कमाने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¥€ है, न कि केवल शैकà¥à¤·à¤£à¤¿à¤• उपलबà¥à¤§à¤¿à¥¤
मेंटेनेंस का उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ आरà¥à¤¥à¤¿à¤• विवशता से बचाना है ना कि आलस को बढ़ावा देना । इसलिठअसली सवाल यह नहीं है कि “कà¥à¤¯à¤¾ वह शिकà¥à¤·à¤¿à¤¤ है?â€, बलà¥à¤•ि यह है:
- कà¥à¤¯à¤¾ वह शारीरिक और मानसिक रूप से सकà¥à¤·à¤® है?
- कà¥à¤¯à¤¾ उसके पास योगà¥à¤¯à¤¤à¤¾ या कौशल है?
- कà¥à¤¯à¤¾ उसमें कमाने की वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ है?
- कà¥à¤¯à¤¾ वह जानबूà¤à¤•र काम न करने का निरà¥à¤£à¤¯ ले रही है?
मेंटेनेंस कानून वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• और वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के आधार पर मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन करता है, न कि पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤•ातà¥à¤®à¤• या केवल सहानà¥à¤à¥‚ति को आधार बना कर।
अदालतें इन सà¤à¥€ पहलà¥à¤“ं को मिलाकर यह तय करती हैं कि मेंटेनेंस वासà¥à¤¤à¤µ में आरà¥à¤¥à¤¿à¤• कठिनाई रोकने में सहायक होगा, या फिर यह जानबूà¤à¤•र निरà¥à¤à¤°à¤¤à¤¾ को बढ़ावा देगा।
अदालतें कैसे संतà¥à¤²à¤¨ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करती हैं ?
अदालतों के पास à¤à¤¸à¤¾ कोई वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• फारà¥à¤®à¥‚ला नहीं है जिससे वे इन सà¤à¥€ कारकों के आधार पर मेंटेनेंस तय कर सकें, असल में ये चारों कारकों में à¤à¤• संतà¥à¤²à¤¨ बनाती हैं जिससे वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• कठिनाई से बचा जा सके और निषà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ को बढ़ावा ना मिले।
जहाठवासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है, वहाठà¤à¤°à¤£-पोषण दिया जाता है।
जहाठकà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ तो होती है लेकिन पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ नहीं, वहाठअदालतें संतà¥à¤²à¤¨ बनाने की कोशिश करती हैं, और मेंटेनेंस की रकम कम कर दी जाती है ।
मेंटेनेंस कानूनों में पतà¥à¤¨à¥€ की कमाने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ का आकलन
मेंटेनेंस से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ पà¥à¤°à¤®à¥à¤– पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤§à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚, जैसे- धारा 125 CrPC, हिंदू विवाह अधिनियम (HMA) की धारा 24 और 25, तथा घरेलू हिंसा अधिनियम (DV ACT) इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿, सà¤à¥€ कानूनों के अंतरà¥à¤—त जो समान सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त अपनाया जाता है, वह है : आरà¥à¤¥à¤¿à¤• आवशà¥à¤¯à¤•ताओं का मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन कमाने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ के साथ किया जाना चाहिà¤à¥¤
- धारा 125 CrPC: इसके अंतरà¥à¤—त डिगà¥à¤°à¥€ के अलावा यह à¤à¥€ देखा जाता है कि, मेंटेनेंस की मांग करने वाली पतà¥à¤¨à¥€, सà¥à¤µà¤¯à¤‚ कितनी सकà¥à¤·à¤® है, वह सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ à¤à¤µà¤‚ शिकà¥à¤·à¤¿à¤¤ है या नहीं, नौकरी का अनà¥à¤à¤µ इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿, अगर वह सारी सकà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾à¤“ं के बाद à¤à¥€ बेरोज़गारी का निरà¥à¤£à¤¯ लेती है तो मेंटेनेंस निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करते समय इसे धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखा जाता है ।
- हिंदू विवाह अधिनियम (HMA): धारा 24 के अंतरà¥à¤—त अंतरिम मेंटेनेंस को निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करते समय तातà¥à¤•ालिक जरूरतों को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखा जाता है और धारा 25 के तहत परमानेंट à¤à¤²à¤¿à¤®à¤¨à¥€ में योगà¥à¤¯à¤¤à¤¾, पूरà¥à¤µ रोजगार अनà¥à¤à¤µ और आतà¥à¤®à¤¨à¤¿à¤°à¥à¤à¤°à¤¤à¤¾ की वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ देखी जाती है। शिकà¥à¤·à¤¿à¤¤ और रोजगार-योगà¥à¤¯ पतà¥à¤¨à¥€ के मामलों में अदालतें परमानेंट à¤à¤²à¤¿à¤®à¤¨à¥€ को लेकर अधिक सतरà¥à¤• रहती हैं, और इसे घटाया या नकारा जा सकता है।
- घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act): इसमें à¤à¥€ मेंटेनेंस सà¥à¤µà¤¤à¤ƒ नहीं मिलता। शिकà¥à¤·à¤¾, रोजगार-योगà¥à¤¯à¤¤à¤¾ और आतà¥à¤®à¤¨à¤¿à¤°à¥à¤à¤° बनने के वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ की जाà¤à¤š की जाती है और उसकी के आधार पर मेंटेनेंस निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ किया जाता है।
- नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¨ (समरà¥à¤¥à¤¨ और उतà¥à¤¤à¤°à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤¤à¥à¤µ का संतà¥à¤²à¤¨): हाल के नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤• फ़ैसले, सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ और जवाबदेही के बीच संतà¥à¤²à¤¨ बनाने के सचेत पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¥‡ हैं। हालांकि वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• रूप से कमजोर लोगों को समरà¥à¤¥à¤¨ मिलता रहता है, लेकिन वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ बेरोजगारी के बजाय संà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ आय कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ निरà¥à¤£à¤¾à¤¯à¤• कारक बनती जा रही है।
वे परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤ जहाठमेंटेनेंस के दावे पर गंà¤à¥€à¤° सवाल उठते हैं
जब पतà¥à¤¨à¥€ अचà¥à¤›à¥€ तरह शिकà¥à¤·à¤¿à¤¤, पेशेवर रूप से योगà¥à¤¯ या पहले से कारà¥à¤¯-अनà¥à¤à¤µ रखने वाली होती है, लेकिन फिर à¤à¥€ काम नहीं करती, तो à¤à¤¸à¥‡ मामलों में अदालतें दावे की कड़ी जाà¤à¤š करती हैं।
अनेक पति उस समय तीवà¥à¤° आरà¥à¤¥à¤¿à¤• और मानसिक दबाव à¤à¥‡à¤²à¤¤à¥‡ हैं जब पतà¥à¤¨à¥€ की कमाने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ के बावजूद à¤à¤°à¤£-पोषण माà¤à¤—ा जाता है। अदालतें विशेष रूप से उन मामलों पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देती हैं जहाठपतà¥à¤¨à¥€ ने:
- अपनी इचà¥à¤›à¤¾ से नौकरी छोड़ी हो
- काम ढूंढने का कोई ईमानदार पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ न किया हो
- आय या संपतà¥à¤¤à¤¿ को शपथपतà¥à¤° में छिपाया हो
इन परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में à¤à¤°à¤£-पोषण सहायता के बजाय आरà¥à¤¥à¤¿à¤• दबाव का साधन बन सकता है—विशेषकर तब, जब पति पहले से मà¥à¤•दमे का खरà¥à¤š, आवासीय वà¥à¤¯à¤¯ और सामाजिक कलंक à¤à¥‡à¤² रहा हो।
फिर à¤à¥€ असलियत में, इन कारणों के होते हà¥à¤ à¤à¥€ मेंटेनेंस को पूरà¥à¤£à¤¤à¤ƒ बहà¥à¤¤ कम इंकार किया जाता है । अकà¥à¤¸à¤° पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ को कम राशि पर ही सही, à¤à¥à¤—तान जारी रखने का आदेश दिया जाता है—जिससे पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ की आरà¥à¤¥à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ और अधिक कमजोर हो जाती है।
शिकà¥à¤·à¤¿à¤¤ पतà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के à¤à¤°à¤£-पोषण पर नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤• वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾
Chaturbhuj v. Sita Bai (2008), SC:सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥à¤š नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ ने सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ किया कि मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन इस बात का होना चाहिठकि कà¥à¤¯à¤¾ पतà¥à¤¨à¥€ अपना à¤à¤°à¤£-पोषण करने में समरà¥à¤¥ है या नहीं, न कि पति के à¤à¥à¤—तान कर सकने की सकà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को। इस फैसले ने सहानà¥à¤à¥‚ति के बजाय आय कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ के मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन की नींव रखी।।
Shamima Farooqui v. Shahid Khan (2015), SC: मेंटेनेंस के अधिकार की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ करते हà¥à¤, नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ ने इस बात पर जोर दिया कि इसका उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ बेबसी को रोकना है, न कि निरà¥à¤à¤°à¤¤à¤¾ पैदा करना – जिसका हवाला अकà¥à¤¸à¤° पà¥à¤°à¥à¤· दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अपने खिलाफ बढ़ा-चढ़ाकर किठगठदावों में बचाव के लिठदिया जाता है।
Manish Jain v. Akanksha Jain (2017), SC: नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ ने माना कि मेंटेनेंस उचित और तरà¥à¤•संगत होना चाहिà¤, जिसमें पतà¥à¤¨à¥€ की योगà¥à¤¯à¤¤à¤¾ और पति की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखा जाà¤, और चेतावनी दी की मेंटेनेंस को मूल रूप से महिलाओं के लिठआरà¥à¤¥à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार ना समà¤à¤¾ जाये।
Mamta v. Rajesh (2018), Delhi High Court: पतà¥à¤¨à¥€ के योगà¥à¤¯, सकà¥à¤·à¤® à¤à¤µà¤‚ जानबूठकर बेरोजगार होने के कारण, मेंटेनेंस से इंकार कर दिया गया, जिससे इस बात की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ होती है कि अगर सही तथà¥à¤¯ दिठजाà¤à¤ तो अदालतें आय का अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ लगाकर मेंटेनेंस से इंकार à¤à¥€ करती हैं।
Rajnesh v. Neha (2020), SC: दोनों पकà¥à¤·à¥‹à¤‚ से आय संबंधी शपथ-पतà¥à¤° अनिवारà¥à¤¯ करके, नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ ने अपà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· रूप से पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ को आय के दमन और à¤à¥‚ठे आशà¥à¤°à¤¿à¤¤à¤¤à¤¾ दावों को उजागर करने के लिठसशकà¥à¤¤ बनाया।
नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤• सोच में विकास : सिरà¥à¤« मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾, पूरà¥à¤£ राहत नहीं
मेंटेनेंस कानून में बदलाव आ रहा है, और अदालतें अब खà¥à¤²à¥‡ तौर पर यह à¤à¥€ सà¥à¤µà¥€à¤•ार करती हैं कि शिकà¥à¤·à¤¾ और कमाने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ मायने रखती है। हालांकि, यह मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ अà¤à¥€ तक पूरी तरह से राहत देने में विफल रही है।
अदालतें यह तो सà¥à¤µà¥€à¤•ार कर सकती हैं कि पतà¥à¤¨à¥€ कमाने में सकà¥à¤·à¤® है, फिर à¤à¥€ इस आधार पर मेंटेनेंस का आदेश दे सकती हैं, इस तरà¥à¤• के साथ कि वह वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ में कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ नहीं है या उसे आतà¥à¤®à¤¨à¤¿à¤°à¥à¤à¤° होने के लिठसमय चाहिà¤à¥¤ परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प, रिकॉरà¥à¤¡ में अनà¥à¤•ूल पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤§à¤¾à¤¨ होने के बावजूद, पà¥à¤°à¥à¤· लंबे समय तक चलने वाले मà¥à¤•दमों के दौरान वितà¥à¤¤à¥€à¤¯ जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ निà¤à¤¾à¤¤à¥‡ रहते हैं।
कानूनी सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त और वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• परिणाम के बीच यह अंतर इस बात को उजागर करता है कि पà¥à¤°à¤—तिशील रूप से तरà¥à¤•संगत कानूनी ढांचे के à¤à¥€à¤¤à¤° à¤à¥€ पà¥à¤°à¥à¤· आरà¥à¤¥à¤¿à¤• रूप से कितने असà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ बने रहते हैं।
निषà¥à¤•रà¥à¤·: पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के लिठमेंटेनेंस कानून की कठोर सचà¥à¤šà¤¾à¤ˆ
ववरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ कानूनी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ à¤à¤• कड़वी सचà¥à¤šà¤¾à¤ˆ को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¥€ है। à¤à¤• शिकà¥à¤·à¤¿à¤¤ पतà¥à¤¨à¥€ सà¥à¤µà¤¤à¤ƒ ही मेंटेनेंस के अपने अधिकार से वंचित नहीं हो जाती, और कई मामलों में, आय कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ के संबंध में वैध तरà¥à¤•ों के बावजूद à¤à¥€ पति को à¤à¤°à¤£-पोषण का à¤à¥à¤—तान करने का निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶ दिया जाता है।
à¤à¤°à¤£-पोषण का मामला तथà¥à¤¯à¥‹à¤‚ पर आधारित होता है, लेकिन वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ में वितà¥à¤¤à¥€à¤¯ बोठलगà¤à¤— हमेशा पति पर ही पड़ता है। पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के लिà¤, इसका अरà¥à¤¥ है à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ से निपटना जो सैदà¥à¤§à¤¾à¤‚तिक रूप से दà¥à¤°à¥à¤ªà¤¯à¥‹à¤— को सà¥à¤µà¥€à¤•ार करती है, लेकिन असलियत में हमेशा वितà¥à¤¤à¥€à¤¯ दायितà¥à¤µ को बनाये रखती है—जिससे मेंटेनेंस संबंधी केस न केवल à¤à¤• कानूनी लड़ाई बन जाती है, बलà¥à¤•ि आरà¥à¤¥à¤¿à¤• और à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• सहनशकà¥à¤¤à¤¿ की à¤à¤• लंबी परीकà¥à¤·à¤¾ à¤à¥€ बन जाती है।
विधायी पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤§à¤¾à¤¨ (Statutory Provisions)
| कानून / धारा | संबंधित अधिनियम | किसके लिठलागू | कानूनी उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ | कमाने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ पर नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤• दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण |
| Section 125 | दंड पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ संहिता (CrPC) | पतà¥à¤¨à¥€, बचà¥à¤šà¥‡, माता-पिता | आरà¥à¤¥à¤¿à¤• बदहाली रोकना | केवल डिगà¥à¤°à¥€ नहीं, बलà¥à¤•ि सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯, योगà¥à¤¯à¤¤à¤¾, अनà¥à¤à¤µ और सà¥à¤µà¥ˆà¤šà¥à¤›à¤¿à¤• बेरोज़गारी पर विचार किया जाता है |
| Section 24 | हिंदू विवाह अधिनियम (HMA) | पति / पतà¥à¤¨à¥€ | मà¥à¤•दमे के दौरान अंतरिम à¤à¤°à¤£-पोषण | तातà¥à¤•ालिक ज़रूरतें देखी जाती हैं, पर शिकà¥à¤·à¤¿à¤¤ पतà¥à¤¨à¥€ की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता |
| Section 25 | हिंदू विवाह अधिनियम (HMA) | पति / पतà¥à¤¨à¥€ | सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ गà¥à¤œà¤¼à¤¾à¤°à¤¾ à¤à¤¤à¥à¤¤à¤¾ (Permanent Alimony) | योगà¥à¤¯à¤¤à¤¾, पूरà¥à¤µ रोजगार और आतà¥à¤®à¤¨à¤¿à¤°à¥à¤à¤°à¤¤à¤¾ की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ निरà¥à¤£à¤¾à¤¯à¤• कारक |
| Section 20 | घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act) | पतà¥à¤¨à¥€ | आरà¥à¤¥à¤¿à¤• राहत व मेंटेनेंस | मेंटेनेंस सà¥à¤µà¤¤à¤ƒ नहीं—कमाने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ और पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ की जाà¤à¤š अनिवारà¥à¤¯ |
पà¥à¤°à¤®à¥à¤– नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤• निरà¥à¤£à¤¯ (Case Laws Interpretation)
| केस नाम | नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ / वरà¥à¤· | मà¥à¤–à¥à¤¯ कानूनी सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त | शिकà¥à¤·à¤¿à¤¤ / सकà¥à¤·à¤® पतà¥à¤¨à¥€ पर पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ |
| Chaturbhuj v. Sita Bai | सà¥à¤ªà¥à¤°à¥€à¤® कोरà¥à¤Ÿ, 2008 | पतà¥à¤¨à¥€ आतà¥à¤®à¤¨à¤¿à¤°à¥à¤à¤° है या नहीं—यह निरà¥à¤£à¤¾à¤¯à¤• पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ | सहानà¥à¤à¥‚ति नहीं, आय कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ का मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन आवशà¥à¤¯à¤• |
| Shamima Farooqui v. Shahid Khan | सà¥à¤ªà¥à¤°à¥€à¤® कोरà¥à¤Ÿ, 2015 | मेंटेनेंस का उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ बेबसी रोकना है | निरà¥à¤à¤°à¤¤à¤¾ को बढ़ावा देना कानून का उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ नहीं |
| Manish Jain v. Akanksha Jain | सà¥à¤ªà¥à¤°à¥€à¤® कोरà¥à¤Ÿ, 2017 | मेंटेनेंस उचित और तरà¥à¤•संगत होना चाहिठ| इसे महिलाओं के लिठ“आरà¥à¤¥à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार†नहीं माना जा सकता |
| Mamta v. Rajesh | दिलà¥à¤²à¥€ हाईकोरà¥à¤Ÿ, 2018 | जानबूà¤à¤•र बेरोज़गारी असà¥à¤µà¥€à¤•ारà¥à¤¯ | सकà¥à¤·à¤® पतà¥à¤¨à¥€ को मेंटेनेंस से इंकार किया गया |
| Rajnesh v. Neha | सà¥à¤ªà¥à¤°à¥€à¤® कोरà¥à¤Ÿ, 2020 | आय-शपथपतà¥à¤° अनिवारà¥à¤¯ | à¤à¥‚ठी निरà¥à¤à¤°à¤¤à¤¾ और आय छिपाने पर रोक |
सिसà¥à¤Ÿà¤® की वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤•ता (Ground Reality Table)
| कानूनी सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त | सैदà¥à¤§à¤¾à¤‚तिक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ | ज़मीनी हकीकत |
| कमाने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ | मानà¥à¤¯ | अकà¥à¤¸à¤° केवल राशि घटती है, समापà¥à¤¤ नहीं होती |
| सà¥à¤µà¥ˆà¤šà¥à¤›à¤¿à¤• बेरोज़गारी | असà¥à¤µà¥€à¤•ारà¥à¤¯ | फिर à¤à¥€ अंतरिम मेंटेनेंस जारी |
| अंतरिम à¤à¤°à¤£-पोषण | असà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ राहत | वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ तक सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ बोठबन जाता है |
| लैंगिक निषà¥à¤ªà¤•à¥à¤·à¤¤à¤¾ | कागज़ पर मौजूद | आरà¥à¤¥à¤¿à¤• à¤à¤¾à¤° लगà¤à¤— हमेशा पà¥à¤°à¥à¤· पर |
मà¥à¤–à¥à¤¯ निषà¥à¤•रà¥à¤· (Key Takeaways)
- à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ कानून कमाने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को मानता है, लेकिन वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° में मेंटेनेंस का बोठलगà¤à¤— हमेशा पति पर ही डाला जाता है।
- शिकà¥à¤·à¤¿à¤¤ और सकà¥à¤·à¤® पतà¥à¤¨à¥€ की सà¥à¤µà¥ˆà¤šà¥à¤›à¤¿à¤• बेरोज़गारी अकà¥à¤¸à¤° केवल राशि घटाती है, जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ समापà¥à¤¤ नहीं करती।
- अंतरिम मेंटेनेंस “असà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ राहत†नहीं रह गया, बलà¥à¤•ि वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ तक चलने वाला आरà¥à¤¥à¤¿à¤• दंड बन चà¥à¤•ा है।
- कानून दà¥à¤°à¥à¤ªà¤¯à¥‹à¤— को सैदà¥à¤§à¤¾à¤‚तिक रूप से सà¥à¤µà¥€à¤•ार करता है, पर पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ को वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• राहत देने में विफल रहता है।
- मेंटेनेंस सिसà¥à¤Ÿà¤® आज à¤à¥€ इस धारणा पर चलता है कि पति हमेशा à¤à¥à¤—तान करने में सकà¥à¤·à¤® होता है।
FAQs
हाà¤à¥¤ केवल शिकà¥à¤·à¤¾ à¤à¤°à¤£-पोषण से वंचित नहीं करती, इसी कारण पà¥à¤°à¥à¤· असà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रहते हैं।
सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° हाà¤, लेकिन वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° में केवल रकम कम होती है।
बहà¥à¤¤ कम मामलों में à¤à¤¸à¤¾ होता है। अंतरिम मेंटेनेंस आमतौर पर जारी रहता है।
कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि अदालतें सावधानी के नाम पर पहले à¤à¥à¤—तान और बाद में विवाद का रासà¥à¤¤à¤¾ अपनाती हैं—जो वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ चल सकता है।
कागज़ पर हाà¤, ज़मीनी सà¥à¤¤à¤° पर आरà¥à¤¥à¤¿à¤• बोठअब à¤à¥€ पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ पर ही रहता है।
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