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जब माँ बच्चे को हथियार बना देती है: भारत में झूठा चाइल्ड एलियनेशन और पिता के खिलाफ कानूनी हिंसा

पिता के खिलाफ कानूनी हिंसा और झूठा चाइल्ड एलियनेशन

पिता के खिलाफ कानूनी हिंसा और झूठा चाइल्ड एलियनेशन

झूठे चाइल्ड एलियनेशन के मामले एक ऐसी गंभीर मानसिक प्रताड़ना को उजागर करते हैं, जिसमें बच्चे को झूठ और सुनियोजित षड्यंत्रों के ज़रिये उसके ही पिता से दूर कर दिया जाता है। भारतीय कानून इसे रोक सकता है — लेकिन यह तभी संभव है, जब पिता शुरुआत से ही समझदारी से कदम उठाएँ, हर तथ्य का ठोस सबूत रखें और भावनाओं में बहने के बजाय कानून के अनुसार लड़ें।

NEW DELHI: बच्चे को जानबूझकर पिता से दूर करना, जिसे अक्सर झूठा चाइल्ड एलियनेशन के रूप में भी अंजाम दिया जाता है, बच्चों और पिताओं — दोनों पर होने वाला सबसे क्रूर और सबसे अदृश्य अत्याचार है। इसमें न कोई शारीरिक चोट दिखती है, न कोई FIR होती है, न ही कोई मेडिकल रिपोर्ट सामने आती है — लेकिन इससे बच्चे और उसके पिता के रिश्ते में स्थायी दरार पड़ जाती है।

भारत में झूठे चाइल्ड एलियनेशन के मामले प्रायः तलाक, कस्टडी, मेंटेनेंस या अन्य वैवाहिक विवादों के दौरान सामने आते हैं, जब एक माँ इसे हथियार की तरह इस्तेमाल करती है। बच्चे के मन में पिता के खिलाफ ज़हर भरा जाता है — झूठ, डर और भावनात्मक शोषण को कानूनी प्रक्रिया की आड़ में अत्यंत योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया जाता है, और बच्चे के मन में जीवन भर के लिए एक निर्दोष पिता की क्रूर छवि बैठा दी जाती है।

यह कोई “फैमिली मैटर” नहीं है।
यह बच्चे पर मानसिक प्रताड़ना और पिता का कानूनी रूप से शोषण है।

भले ही भारतीय अदालतें “पैरेंटल एलियनेशन सिंड्रोम” शब्द का औपचारिक उपयोग न करें, लेकिन यह आचरण वास्तविक है, जानबूझकर किया जाता है और यदि सही ढंग से लड़ा जाए, तो यह पूरी तरह कानूनी कार्यवाही के योग्य है।

झूठा चाइल्ड एलियनेशन क्या होता है?

बच्चे को पिता से अलग करने की यह मनगढ़ंत प्रक्रिया तब होती है, जब एक अभिभावक — जो अक्सर माँ होती है — जानबूझकर बच्चे को पिता से नफरत करने के लिए उकसाती है, उसके मन में पिता को लेकर डर पैदा करती है और उसे पिता के हर संपर्क या प्रयास को अस्वीकार करने के लिए तैयार करती है, जबकि पिता की ओर से कोई वास्तविक उत्पीड़न या लापरवाही मौजूद नहीं होती।

इसमें शामिल है:

एलियनेशन बच्चे की रक्षा नहीं करता — यह बच्चे और पिता, दोनों के खिलाफ किया गया मानसिक उत्पीड़न है।

माताओं द्वारा एलियनेशन के लिए अपनाए जाने वाले सामान्य हथकंडे, जो भारतीय कस्टडी मामलों में बार-बार सामने आते हैं:

भारत में पिता का हारना सामान्य क्यों है — और इसका बदलना क्यों ज़रूरी है?

भारतीय पारिवारिक मामलों में पिता अक्सर इसलिए पीछे रह जाते हैं, क्योंकि वे रणनीति के बजाय भावनाओं को अपना हथियार बना लेते हैं।
गुस्से, हताशा या टूटे हुए मन से भेजा गया हर मैसेज, कॉल या भावनात्मक प्रतिक्रिया अदालत में “अस्थिर व्यवहार” (Unstable Behaviour) के रूप में पेश कर दी जाती है — और यहीं से पिता का मामला कमज़ोर होने लगता है।

पिता को पहले दिन से ही पीड़ित नहीं, बल्कि वादी (Litigant) की तरह व्यवहार करना होगा।

इसका अर्थ है:

अधिकांश मामलों में पिता इसलिए नहीं हारते क्योंकि वे गलत होते हैं, बल्कि इसलिए हारते हैं क्योंकि वे तैयार नहीं होते।

झूठे चाइल्ड एलियनेशन के मामलों में व्यवस्थित कानूनी रणनीति

हर बात का दस्तावेज़ तैयार करें (मामले यहीं से जीते जाते हैं)

अदालतें भावनाओं पर नहीं, बल्कि व्यवहार के पैटर्न पर भरोसा करती हैं।

मुलाकात आदेशों (Visitation Orders) को सख्ती से लागू कराएँ

बच्चे से संवाद और काउंसलर रिपोर्ट की माँग करें

रेड फ्लैग्स दिखाएँ:

जब मानसिक नियंत्रण हटता है, तब बच्चे का वास्तविक भाव सामने आता है।

क्रॉस-एग्ज़ामिनेशन से झूठे आरोप उजागर करें

झूठे आरोप दबाव पड़ते ही टूटने लगते हैं।

एलियनेशन सिद्ध होने पर कस्टडी में बदलाव की माँग करें

अदालतें स्पष्ट कर चुकी हैं कि जो अभिभावक बच्चे को दूसरे माता-पिता से दूर करता है, वह विशेष कस्टडी के योग्य नहीं होता।

स्कूल और अन्य थर्ड-पार्टी रिकॉर्ड का सही उपयोग करें

निष्पक्ष रिकॉर्ड का प्रमाणिक मूल्य अत्यंत अधिक होता है।

वे मनोवैज्ञानिक सत्य जिन्हें अदालतें अब स्वीकार कर रही हैं

बच्चे बिना कारण अपने माता-पिता को अस्वीकार नहीं करते।

एलियनेशन के संकेत:

पैरेंटल एलियनेशन बच्चे की पसंद नहीं होती।
यह मनोवैज्ञानिक कंडीशनिंग है, जिसके दुष्परिणाम आजीवन होते हैं।

पिता को तुरंत किन गलतियों से बचना चाहिए

मौन शांति नहीं लाता — मौन उत्पीड़न को बढ़ावा देता है।

निष्कर्ष: एलियनेशन उत्पीड़न है — और इसे वैसे ही लड़ना होगा

झूठा चाइल्ड एलियनेशन न भावनाओं का मुद्दा है, न लिंग का।
यह एक सुनियोजित मनोवैज्ञानिक उत्पीड़न है, जिसमें बच्चे को हथियार बनाया जाता है।

यदि एलियनेशन को शुरुआत में चुनौती नहीं दी गई,
तो नुकसान केवल कस्टडी का नहीं होता — नुकसान बच्चे की सोच, भरोसे और भावनात्मक भविष्य का होता है।

व्याख्यात्मक तालिका: झूठे चाइल्ड एलियनेशन मामलों में लागू कानून

कानून / धाराक्या कहती हैपिता के लिए इसका मतलब
Guardians and Wards Act, 1890 – Sec. 7कस्टडी बदलने की शक्तिएलियनेशन साबित होने पर कस्टडी बदली जा सकती है
Guardians and Wards Act, 1890 – Sec. 17बच्चे का कल्याण सर्वोपरिमानसिक ब्रेनवॉश child welfare के खिलाफ है
Hindu Minority and Guardianship Act, 1956 – Sec. 13बच्चे का हित सर्वोच्चबच्चे को भड़काने वाला अभिभावक कस्टडी के योग्य नहीं
Hindu Minority and Guardianship Act, 1956 – Sec. 6प्राकृतिक अभिभावकएलियनेशन से पिता का दर्जा खत्म नहीं होता
CPC – Order XXIआदेश का निष्पादनविज़िटेशन ऑर्डर ज़बरदस्ती लागू कराए जा सकते हैं
CPC – O.39 R.2Aआदेश उल्लंघन पर सज़ामिलने से रोकना दंडनीय हो सकता है
Contempt of Courts Actअवमाननाबार-बार इनकार सिविल कंटेम्प्ट है
Juvenile Justice Act, 2015 – Sec. 2(9)संरक्षण की ज़रूरत वाला बच्चामानसिक शोषण JJ Act में आता है
Juvenile Justice Act, 2015 – Sec. 75बच्चे के प्रति क्रूरताभावनात्मक क्रूरता अपराध है
Evidence Act – Sec. 114(g)प्रतिकूल अनुमानसबूत छुपाने पर अदालत खिलाफ़ अनुमान लगाएगी
Evidence Act – Sec. 155विश्वसनीयता पर हमलाकोच किए गए बयान कमजोर माने जाते हैं
IPC – Sec. 191/193झूठी गवाहीझूठ बोलना आपराधिक अपराध है
Family Courts Act – Sec. 12काउंसलर सहायताब्रेनवॉश और हेरफेर पकड़ा जाता है
Article 21गरिमा का अधिकारपिता-बच्चे का रिश्ता मौलिक अधिकार है
Article 39(f)बच्चों का संरक्षणभावनात्मक उपेक्षा असंवैधानिक है

FAQs

यह एक सुनियोजित मानसिक शोषण है, जिसमें बच्चे को झूठ, डर और ब्रेनवॉश के ज़रिये पिता के खिलाफ किया जाता है।

हाँ, भारतीय अदालतें इसे बच्चे के कल्याण के विरुद्ध गंभीर और हानिकारक आचरण मानती हैं।

सबसे पहले बच्चे को, और उसके बाद उस पिता को जिसे जानबूझकर बच्चे से काट दिया जाता है।

मुलाकात से इनकार के रिकॉर्ड, कॉल लॉग, काउंसलर रिपोर्ट और एक जैसे व्यवहार का लगातार पैटर्न सबसे मज़बूत सबूत होते हैं।

हाँ, अदालत साझा हिरासत, पैरलल पैरेंटिंग या गंभीर मामलों में कस्टडी ट्रांसफर का आदेश दे सकती है।

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